Central Samvadनई दिल्ली, 16 जुलाई 2026
भारतीय रेलवे देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन शुरू करने की तैयारी में है। यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से स्वयं बिजली उत्पन्न करेगी और इसके संचालन के दौरान जल वाष्प के अलावा कोई प्रदूषक उत्सर्जन नहीं होगा।

इसे भारत में स्वच्छ और टिकाऊ रेल परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।भारतीय रेलवे ने पिछले वर्षों में 99 प्रतिशत से अधिक ब्रॉडगेज रेल मार्गों का विद्युतीकरण किया है। अब हाइड्रोजन तकनीक के माध्यम से रेलवे हरित परिवहन की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ा रहा है।

पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों के विपरीत यह ट्रेन ओवरहेड बिजली लाइनों पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि ट्रेन के भीतर स्थापित प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) फ्यूल सेल के माध्यम से बिजली का उत्पादन करेगी।इस ट्रेन में 10 कोच होंगे और लगभग 2,600 यात्रियों के सफर की क्षमता होगी।

यह जिंद-सोनीपत रेलखंड पर संचालित की जाएगी, जिसकी परिचालन गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा तथा डिजाइन गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। वर्तमान में दुनिया की अधिकांश हाइड्रोजन ट्रेनें दो या तीन कोच वाली हैं, जबकि भारतीय रेलवे की यह ट्रेन अधिक क्षमता वाली यात्री सेवा प्रदान करेगी।सुरक्षा के लिहाज से ट्रेन में हाइड्रोजन रिसाव, गर्मी, आग और धुएं का पता लगाने वाले बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र लगाए गए हैं।

यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेन का लोड बॉक्स परीक्षण, रेडियो फ्रीक्वेंसी परीक्षण, दोलन परीक्षण, आपातकालीन ब्रेक दूरी परीक्षण तथा स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।भारतीय रेलवे के अनुसार, हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से संचालित यह ट्रेन कार्बन उत्सर्जन को कम करने, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह परियोजना भारत को हरित और आधुनिक रेल परिवहन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

