Central Samvad रायपुर, 13 जुलाई
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक ढोकरा कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को बस्तर की प्रसिद्ध ‘ट्री ऑफ लाइफ’ (जीवन वृक्ष) ढोकरा धातु शिल्पकृति भेंट की। इस कूटनीतिक उपहार के माध्यम से छत्तीसगढ़ की जनजातीय कला और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर सम्मान मिला है।
यह उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। बस्तर की ढोकरा कला अपनी प्राचीन परंपरा, हस्तनिर्मित शिल्प कौशल और अनूठी कलात्मक शैली के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। प्रधानमंत्री द्वारा इस शिल्पकृति का चयन राज्य की समृद्ध लोककला की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति, लोककला और पारंपरिक हस्तशिल्प के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है। कलाकारों और शिल्पकारों को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिससे छत्तीसगढ़ की कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है।
संस्कृति विभाग भी राज्य की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में लोककला और पारंपरिक शिल्प को नई पीढ़ी से जोड़ने तथा वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में कई पहल की जा रही हैं।
बस्तर की ढोकरा कला लॉस्ट वैक्स कास्टिंग यानी मोम सांचा ढलाई तकनीक से तैयार की जाती है, जिसे दुनिया की सबसे प्राचीन धातु ढलाई विधियों में माना जाता है। प्रत्येक शिल्पकृति पूरी तरह हाथ से बनाई जाती है, इसलिए हर कलाकृति अपनी बनावट और सौंदर्य में अलग होती है।
‘ट्री ऑफ लाइफ’ शिल्पकृति भारतीय संस्कृति में प्रकृति, समृद्धि, नवजीवन और सह-अस्तित्व का प्रतीक मानी जाती है। यह भारत और न्यूजीलैंड के माओरी समुदाय की सांस्कृतिक अवधारणाओं के बीच भी एक सुंदर सेतु का कार्य करती है।

प्रधानमंत्री द्वारा इस शिल्पकृति को अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक उपहार के रूप में चुने जाने से बस्तर के शिल्पकारों का उत्साह बढ़ेगा, स्थानीय हस्तशिल्प को नए बाजार मिलेंगे और छत्तीसगढ़ की जनजातीय कला को विश्वभर में नई पहचान मिलेगी।

