Central Samvadरायपुर, 08 सितंबर 2026
छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और परंपराओं से सजे ‘लोकरंग पर्व’ के दूसरे दिन 7 सितम्बर को मुक्ताकाशी मंच पर लोकगाथाओं और लोकविधाओं की रंगारंग प्रस्तुतियां हुईं। ‘लोरिक चंदा’, ददरिया और चंदैनी की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा।

कार्यक्रम की शुरुआत व्यासनाथ योगी एवं साथियों की ‘लोरिक चंदा’ प्रस्तुति से हुई। इसके बाद विजय साहू एवं साथियों ने ददरिया की मधुर धुनों से समां बांधा। बरसन देशलहरे ने चंदैनी के माध्यम से प्रेम, लोकजीवन और मानवीय संवेदनाओं को सुरों में प्रस्तुत किया।संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि लोरिक चंदा, चंदैनी गीत और ददरिया जैसी लोकविधाएं छत्तीसगढ़ के लोकजीवन की पहचान हैं।

ऐसे आयोजन कलाकारों को मंच देने के साथ लोकपरंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कार्यक्रम में पूर्व संचालक अनिल कुमार साहू, उपसंचालक उमेश मिश्रा, कवि मीर अली मीर, सहित सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोग उपस्थित रहे।‘लोकरंग पर्व’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं, लोकगीतों, लोकसंगीत और पारंपरिक लोकनृत्यों को एक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है।

