नेपाल में आई भीषण बाढ़ से करीब 160 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 133 भारतीय नागरिकों समेत 750 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ ने कई कस्बों और गांवों को प्रभावित किया है। कई महत्वपूर्ण पुल बह गए हैं और जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक 157 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और करीब 500 लोग लापता हैं।

वहीं चीन की सीमा से लगे क्षेत्र में भी तीन लोगों की मौत और 265 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।बताया गया है कि तिब्बत क्षेत्र में भूकंप के कुछ मिनट बाद अचानक आई बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहु और नवलपरासी पूर्व सहित कई जिलों में बाढ़ का असर देखा गया।
प्रभावित क्षेत्रों से करीब 100 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस राहत एवं बचाव अभियान में जुटे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत कर हरसंभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया है। भारत ने राहत सामग्री, आवश्यक दवाएं, अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट और सौर लैंप सहित 10 टन सामग्री नेपाल भेजी है।काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कम से कम 50 भारतीय तीर्थयात्रियों के भी लापता होने की जानकारी है।वहीं विश्व बैंक ने राहत, बचाव और पुनर्निर्माण के लिए नेपाल को 25 अरब नेपाली रुपये की आपातकालीन वित्तीय सहायता देने की पेशकश की है। नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने बाढ़ से हुई जनहानि और नुकसान पर दुख जताया है।

