
कहते हैं, अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो तो शारीरिक बाधाएँ सिर्फ एक पड़ाव बनकर रह जाती हैं, मंज़िल नहीं। राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव ब्लॉक के ग्राम हरदी के निवासी भीमा मारकंडे की कहानी आज संघर्ष कर रहे हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
भीमा की जिंदगी तब बदल गई, जब हैदराबाद में निर्माण कार्य के दौरान वे ऊँचाई से गिर गए। कमर में गंभीर चोट ने उनके चलने-फिरने की क्षमता छीन ली। 80 प्रतिशत दिव्यांगता के साथ 9 वर्ष और 4 वर्ष की दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी उठाना बेहद कठिन हो गया। बैसाखी ही उनका सहारा थी, लेकिन हौसला अभी भी कायम था।
उम्मीद की नई किरण: समाज कल्याण विभाग की पहल
भीमा ने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुना। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के माध्यम से बैटरी चालित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल के लिए आवेदन किया। 4 मई 2026 को राजनांदगांव के मोतीपुर में आयोजित सुशासन तिहार में उन्हें यह सुविधा मिली। यह उनके लिए सिर्फ एक साधन नहीं, बल्कि नई आज़ादी का प्रतीक बन गया।
मजबूरी बनी ताकत
बैटरी चालित ट्राइसाइकिल मिलने के बाद भीमा के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब वे रोजगार की तलाश में दूर-दराज क्षेत्रों तक बिना किसी सहारे जा सकते हैं। दूसरों पर निर्भरता कम होने से वे समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भूमिका निभा पाएंगे। अपनी बेटियों के बेहतर भविष्य के लिए उन्होंने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ दिया है।
भीमा का कहना है कि राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सुशासन तिहार के माध्यम से आम लोगों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। वे इस सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हैं।
अन्य दिव्यांगों के लिए भी राहत
समाज कल्याण विभाग की उपसंचालक वैशाली मरड़वार ने बताया कि जिला प्रशासन की पहल के तहत 40 से 79 प्रतिशत दिव्यांगता वाले लोग भी अब मोटराइज्ड साइकिल के पात्र होंगे। ALIMCO के CSR मद से जिले के 109 पात्र लोगों को यह सुविधा दी जाएगी।
भीमा मारकंडे की कहानी उनके अटूट संकल्प की मिसाल है। यह बताती है कि सही अवसर और दृढ़ इच्छाशक्ति मिलकर जीवन की दिशा बदल सकते हैं। अब भीमा रुकने वाले नहीं, बल्कि आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

