बिना सुई, बिना दर्द,अब त्वचा से पहुंचेगी दवा
एनआईटी रायपुर के युवा शोधकर्ताओं ने विकसित की भविष्य की हेल्थकेयर तकनीक

Central Samvad रायपुर 13 मई । राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, एन आई टी रायपुर के युवा शोधकर्ताओं ने बायोमेडिकल तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के शोधकर्ताओं को दर्द रहित और स्मार्ट तरीके से दवा पहुंचाने वाली दो अत्याधुनिक “माइक्रोनीडल पैच” तकनीकों पर डिज़ाइन पेटेंट प्राप्त हुए हैं। यह उपलब्धि भविष्य की हेल्थकेयर प्रणाली में एक बड़े बदलाव की संभावना के रूप में देखी जा रही है।
पहला डिज़ाइन पेटेंट “PVA-Based Microneedle Patch” शीर्षक से प्राप्त हुआ है। इसे श्री अनुराग अजगले और डॉ. चिन्मय महापात्रा ने विकसित किया है।
यह पैच विशेष बायोडिग्रेडेबल और बायोकम्पैटिबल पॉलिमर “PVA” पर आधारित है, जो त्वचा के माध्यम से बिना दर्द के दवा पहुंचाने में सक्षम है।यह तकनीक दवा को नियंत्रित और धीरे-धीरे रिलीज कर सकती है, जिससे बार-बार इंजेक्शन लेने की आवश्यकता कम हो सकती है। यह पैच एक बैंडेज की तरह त्वचा से चिपका रहता है और धीरे-धीरे दवा को शरीर में पहुंचाने का कार्य करता है।

दूसरा डिज़ाइन पेटेंट “Microneedle Patch” शीर्षक से प्राप्त हुआ है। इसे सुश्री निहारिका पुरोहित, श्री अनुराग अजगले, डॉ. बैद्यनाथ बाघ और डॉ. चिन्मय महापात्रा ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।

यह एक “स्मार्ट माइक्रोनीडल पैच” है, जो विशेष conductive material PEDOT:PSS पर आधारित है।

इस तकनीक में हल्के इलेक्ट्रिक सिग्नल की सहायता से दवा को नियंत्रित तरीके से शरीर में पहुंचाया जा सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में “सुई रहित इलाज”, वियरेबल हेल्थकेयर डिवाइसेस और पर्सनलाइज्ड मेडिसिन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य मरीजों के लिए इलाज को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और प्रभावी बनाना है।एनआईटी रायपुर की यह उपलब्धि न केवल संस्थान बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।
एनआई टी के निदेशक डॉ एन वी रमना राव ने दोनों शोधकर्ताओं को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

