Central Samvad रायपुर 12जून
कथक गुरु पं. रामलाल को अकादमी फेलोशिप, अनूप रंजन पाण्डे को अकादमी पुरस्कार, आनंद पाण्डेय और घनश्याम साहू को उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार
संस्कृति मंत्रालय ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप (अकादमी रत्न), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान सूची में अविभाजित रायगढ़ क्षेत्र के चार कला साधकों का चयन होने से छत्तीसगढ़ में खुशी की लहर है।कथक के रायगढ़ घराने के वरिष्ठतम गुरु एवं पद्मश्री सम्मानित पंडित रामलाल को संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप (अकादमी रत्न) के लिए चुना गया है।

वहीं लोककला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अनूप रंजन पाण्डे को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

रंगमंच के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए जशपुर के युवा रंगकर्मी आनंद पाण्डेय तथा नाट्य लेखन के लिए सारंगढ़ के घनश्याम साहू को उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है।
विशेष बात यह है कि चयनित चार कलाकारों में से तीन का संबंध अविभाजित रायगढ़ जिले से है। आनंद पाण्डेय और घनश्याम साहू दोनों ने खैरागढ़ विश्वविद्यालय के नाट्य विभाग से रंगमंच की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में दोनों छत्तीसगढ़ में रहकर रंगमंच, फिल्म और सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।आनंद पाण्डेय जशपुर जैसे आदिवासी अंचल में रंगमंच के माध्यम से सांस्कृतिक जागरूकता और सृजनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं,।

जबकि घनश्याम साहू नाट्य लेखन के साथ-साथ फिल्म लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना चुके हैं।

संगीत नाटक अकादमी की सामान्य परिषद ने देशभर के 108 कलाकारों को अकादमी पुरस्कार तथा 106 युवा कलाकारों को उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के लिए चुना है। युवा पुरस्कार के अंतर्गत 25 हजार रुपये, ताम्रपत्र और अंगवस्त्रम प्रदान किया जाएगा। वहीं अकादमी रत्न के साथ तीन लाख रुपये तथा अकादमी पुरस्कार के साथ एक लाख रुपये की सम्मान राशि, ताम्रपत्र और अंगवस्त्रम दिया जाएगा।
संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और अकादमी पुरस्कार राष्ट्रपति द्वारा विशेष अलंकरण समारोह में प्रदान किए जाएंगे, जबकि उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार अकादमी अध्यक्ष द्वारा विशेष समारोह में दिए जाएंगे।खैरागढ़ विश्वविद्यालय के नाट्य विभाग के लिए भी यह गौरव का अवसर माना जा रहा है।
कला जगत से जुड़े लोगों ने इसे छत्तीसगढ़, विशेषकर रायगढ़ अंचल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और प्रतिभा का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान बताया है।

