Central Samvad 13 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र आज से शुरू हो गया है। सत्र के दौरान कुल पांच बैठकें होंगी।
सत्र के पहले दिन सदन में सबसे पहले छत्तीसगढ़ की प्रख्यात पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कला और लोकसंस्कृति के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का एक अनमोल रत्न खो दिया है और कला एवं सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।
श्रद्धांजलि के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने राम मंदिर दान राशि में कथित चोरी का मामला जोर-शोर से उठाया। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से चर्चा कराने की मांग की, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने अग्राह्य कर दिया।
इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन में शोर-शराबा किया, जिसके चलते कुछ समय के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी।
वहीं, प्रश्नकाल में भाजपा विधायक लता उसेंडी ने कोंडागांव स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में बीएड और डीएड पाठ्यक्रम संचालित नहीं होने, रिक्त पदों पर भर्ती और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन का मुद्दा उठाया। जवाब में उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है तथा भर्ती से संबंधित किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने भी प्रदेश में चार वर्षीय बीएड और डीएड पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में सरकार की तैयारियों के बारे में प्रश्न किया। इस पर उच्च शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि प्रदेश के कई महाविद्यालय आवश्यक मानकों के अनुरूप नहीं हैं। नई शिक्षा नीति के अनुरूप चार वर्षीय पाठ्यक्रम लागू करने की प्रक्रिया तय करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है।
इसी तरह प्रश्नकाल में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत गांवों के बंदोबस्त का मामला भी उठा। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि प्रदेश में सात सौ छत्तीस गांव असर्वेक्षित हैं, जिनमें से तीन सौ इकहत्तर गांवों में सर्वेक्षण प्रक्रिया जारी है, जबकि तीन सौ पैंसठ गांवों में सर्वेक्षण शुरू होना शेष है।

