Central Samvad नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026
विश्वमांगल्य सभा की ओर से आयोजित “युगानुकूल मातृत्व” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रबोधन बैठक के समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि मातृत्व सृष्टि के निर्माण, संवर्धन और पोषण का मूल आधार है।

उन्होंने कहा कि मातृत्व के बिना सृष्टि की निरंतरता संभव नहीं है और मां बच्चे की पहली गुरु होती है, जो जीवनभर भावनात्मक संबल प्रदान करती है।डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि “युगानुकूल मातृत्व” का अर्थ मातृत्व के मूल मूल्यों में बदलाव नहीं है।

मातृत्व के शाश्वत सिद्धांत हमेशा कायम रहते हैं, लेकिन समय के अनुसार समाज में सकारात्मक परिवर्तन होते रहते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के संस्कार निर्माण में माता-पिता के व्यवहार और आचरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उन्होंने परिवार के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आज के समय में परिवार के साथ समय बिताना और आपसी संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है।

मजबूत संवाद से ही संस्कारित और जिम्मेदार पीढ़ी का निर्माण संभव है।भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि भारत की संस्कृति विविधता में एकता का संदेश देती है। उन्होंने लोगों से अपनी परंपराओं, इतिहास और जीवन मूल्यों पर विश्वास रखते हुए आगे बढ़ने का आह्वान किया।

यह कार्यक्रम अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। “मातृ निर्माण से राष्ट्र निर्माण” के उद्देश्य से आयोजित इस दो दिवसीय बैठक (23-24 जुलाई) में देश के विभिन्न राज्यों से महिला प्रतिनिधियों ने भाग लिया।छत्तीसगढ़ से विश्वमांगल्य सभा की प्रांत संयोजिका प्रतीक्षा बाबर और सह संयोजिका नीरजा भोंसले ने इस राष्ट्रीय प्रबोधन बैठक में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।

दोनों ने “युगानुकूल मातृत्व” विषय पर आयोजित इस महत्वपूर्ण सत्र में छत्तीसगढ़ की भागीदारी सुनिश्चित की।समापन सत्र में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 900 से अधिक मातृशक्ति उपस्थित रहीं। विश्वमांगल्य सभा मातृत्व के कर्तव्यबोध, सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्यों और महिला नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्य कर रही है।

