Central Samvadनई दिल्ली, 4 अगस्त 2026
संसद ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है। राज्यसभा की मंजूरी के बाद यह विधेयक संसद से पारित हो गया है। इससे पहले लोकसभा इसे पहले ही स्वीकृति दे चुकी थी।

विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन कर विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाना और समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देना है।नए प्रावधानों के अनुसार यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष के बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या उनके द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति से ही किया जा सकेगा।
अनुमति देने से पहले संबंधित अधिकारी को प्रस्तुत जानकारी की सत्यता की जांच करनी होगी।वहीं, यदि जन्म या मृत्यु की सूचना दो वर्ष से अधिक समय बाद दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर ही संभव होगा।सरकार का कहना है कि यह संशोधन समय पर जन्म और मृत्यु पंजीकरण सुनिश्चित करने, फर्जी पंजीकरण पर रोक लगाने तथा नागरिकों की कानूनी पहचान से जुड़े दस्तावेजों को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक योजनाओं और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए आवश्यक कानूनी दस्तावेज माना जाता है।

