Central Samvadरायपुर, 19 जुलाई 2026
रक्षाबंधन के पर्व को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं अनोखी बीज राखियां तैयार कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) की इस पहल का उद्देश्य भाई-बहन के प्रेम के साथ प्रकृति संरक्षण और हरियाली का संदेश देना है।

रायगढ़ जिले में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिला पंचायत और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) की पहल पर इस वर्ष रक्षाबंधन को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का अभिनव प्रयास किया जा रहा है।

जिले के स्व-सहायता समूहों की महिलाएं धान, मक्का, भुट्टा, सेमी, करेला और बरबटी जैसे देसी बीजों से आकर्षक बीज राखियां तैयार कर रही हैं।इन राखियों की खासियत यह है कि उपयोग के बाद इन्हें मिट्टी में डालने पर इनमें लगे बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले सकते हैं।
इस पहल का उद्देश्य रक्षाबंधन के साथ प्रकृति संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का संदेश देना है।जिले के सातों विकासखंडों में इस अभियान को लेकर महिलाओं में उत्साह है। धरमजयगढ़, रायगढ़, लैलूंगा, तमनार, घरघोड़ा और पुसौर सहित विभिन्न क्षेत्रों की स्व-सहायता समूहों की महिलाएं और कृषि सखियां बड़ी संख्या में बीज राखियां बनाने में जुटी हैं।

20 जुलाई को सातों विकासखंडों से एक-एक सर्वश्रेष्ठ बीज राखी का चयन किया जाएगा। राखियों का मूल्यांकन उनकी डिजाइन, देसी बीजों के उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के आधार पर किया जाएगा।प्रतियोगिता में चयनित सातों विजेता महिलाओं को 27 जुलाई को आयोजित समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
इस अवसर पर वे अपने हाथों से बनाई गई बीज राखियां कलेक्टर सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को बांधेंगी। यह पहल अब पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का प्रेरक अभियान बनती जा रही है।

