Central Samvadरायपुर/नई दिल्ली, 19 जुलाई 2026
देश में जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ‘कैच द रेन’ अभियान को नई गति दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से वर्षा जल की हर बूंद को संरक्षित करने और वर्षा जल संचयन को जनभागीदारी के साथ व्यापक रूप से अपनाने का आह्वान किया है।

अभियान के तहत वर्षा जल संग्रह, भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और वृक्षारोपण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।समाचारप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 135वें संस्करण में वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को बचाने की अपील करते हुए कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
इसी उद्देश्य से 4 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक देशभर में ‘कैच द रेन’ अभियान चलाया जा रहा है।अभियान के तहत प्रत्येक घर, आवासीय सोसायटी और कार्यस्थल पर वर्षा जल संचयन प्रणाली अपनाने, रिचार्ज पिट और रिचार्ज शाफ्ट बनाने, अनुपयोगी बोरवेलों को भूजल पुनर्भरण के लिए उपयोग में लाने, बावड़ियों, कुओं और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण तथा तालाबों की गाद हटाकर उनकी जलधारण क्षमता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है।
साथ ही जल संरक्षण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।सरकार के अनुसार ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के पहले चरण में देशभर में 27 लाख से अधिक कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण किया गया। वहीं दूसरे चरण में निर्धारित एक करोड़ लक्ष्य के मुकाबले 31 मई 2026 तक 1.5 करोड़ से अधिक संरचनाओं के निर्माण की सूचना प्राप्त हुई है।1 जून 2026 से शुरू किए गए ‘जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन’ अभियान के माध्यम से वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल भंडारण को बढ़ावा देने के साथ केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का समन्वय भी किया जा रहा है। अभियान में पंचायतों, शहरी निकायों, महिला समूहों, युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
केंद्र सरकार का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जल मांग को देखते हुए वर्षा जल का संरक्षण भविष्य की जल सुरक्षा, कृषि, ग्रामीण आजीविका और सतत विकास के लिए बेहद आवश्यक है। सरकार ने नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है।

