Central Samvad 24जुलाई रायपुर
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जाति प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी परिवार के सदस्य का वैध जाति प्रमाण पत्र पहले से जारी है, तो केवल वर्ष 1950 के दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के आधार पर परिवार के अन्य पात्र बच्चों को जाति प्रमाण पत्र से वंचित नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद की सिंगल बेंच ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जाति प्रमाण पत्र के लिए प्रस्तुत आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर निर्धारित प्रक्रिया पूरी की जाए और 60 दिनों के भीतर मामले का निराकरण करते हुए जल्द से जल्द जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए।
यह फैसला एक याचिका की सुनवाई के दौरान सुनाया गया।वहीं, एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत दर्ज मामलों की जांच में पुलिस अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता पर भी हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि जांच में गंभीर लापरवाही और पुलिस का गैर-पेशेवर रवैया केवल संयोग या अनजाने में हुई गलती नहीं माना जा सकता।
इससे एनडीपीएस कानून का उद्देश्य ही विफल हो जाता है।एक अन्य मामले में कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सात आरोपियों को सुनाई गई 10 से 15 वर्ष की कठोर कारावास और जुर्माने की सजा को रद्द कर दिया।

