Central Samvad रायपुर 13 सितंबर 2026
नई दिल्ली में आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आज संपन्न हो गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ब्रिक्स की विविधता ही उसकी पहचान है और सहयोग के माध्यम से मानवता के हित में ठोस प्रगति सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स केवल देशों का समूह नहीं, बल्कि समाधानों का पारिस्थितिकी तंत्र है।प्रधानमंत्री ने सम्मेलन के समापन भाषण में ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को साझा विजन और भविष्य के सहयोग के लिए महत्वपूर्ण दिशा बताया। उन्होंने घोषणाओं को समयबद्ध कार्यों में बदलने और उनके प्रभाव को जमीन पर दिखाई देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स अब अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा है और दुनिया समूह से ठोस परिणामों की अपेक्षा करती है।सम्मेलन में महामारी, जलवायु आपदाओं और आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग और लचीलापन बढ़ाने पर चर्चा हुई।

संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए ‘ब्रिक्स एकीकृत पूर्व चेतावनी प्रणाली’ और आपदा प्रबंधन के लिए ‘पूर्व चेतावनी डेटा एकीकरण दिशानिर्देश’ तैयार किए गए हैं।भारत ने छोटे उद्यमों को ज्ञान, वित्त और नए बाजारों से जोड़ने के लिए ‘ब्रिक्स-एमएसएमई सहयोग पोर्टल’ तथा स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड’ का प्रस्ताव रखा।

शहरों के बीच बेहतर अनुभव साझा करने के लिए ‘ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब’ और स्मार्ट ग्रिड तथा ऊर्जा भंडारण के लिए ‘ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र’ की स्थापना की गई है।प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स में विकसित समाधानों का लाभ ग्लोबल साउथ के देशों तक भी पहुंचना चाहिए।

उन्होंने अगले अध्यक्ष के रूप में चीन को शुभकामनाएं दीं। सम्मेलन के दूसरे दिन ब्रिक्स सहयोगी देशों के नेताओं ने भी भाग लिया। इनमें मलेशिया, वियतनाम, सऊदी अरब और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव शामिल रहे।

