
यत् पिंडे तत् ब्रह्माण्डे यानी कि जो इस ब्रह्मांड में है, वही हमारे शरीर में भी है। आम जन और ज्योतिषी इस बात को भूल से गए हैं कि जो कुछ इस ब्रह्मांड में है, जैसे कि 9 ग्रह, 27 नक्षत्र आदि-आदि, उन्हीं के अंश हमारे शरीर में हैं, क्योंकि हम उन्हीं से बने हैं।बस इसी सिद्धांत को लागू करते हुए ज्योतिष को समझें और अपना जीवन सरल करें।

रोज़मर्रा के जीवन में इन 9 ग्रहों के असंतुलन से परेशानियाँ उपजती हैं, जिन्हें स्वाभाविक संतुलन, मंत्रोपचार या अनुष्ठान, दान अथवा रत्नों के द्वारा ठीक किया जा सकता है। इसमें सबसे सरल, बेहतर और सटीक उपाय है ग्रहों का संतुलन, जिसे ज्योतिषी बताने में हमेशा हिचकते रहे। कारण यह कि भयादोहन करके पूजा-पाठ और अनुष्ठान उन्हें अपेक्षाकृत आसान लगे।एक बार यदि कोई आम व्यक्ति केवल ग्रहों का स्वभाव समझ ले, उनके कारक तत्वों को समझ ले और उन कारक तत्वों के हिसाब से अपनी दिनचर्या बना ले, तो जीवन के कष्ट आधे से भी कम हो जाएंगे।
जैसे— सूर्य की दशा है और आपकी कुंडली के अनुसार सूर्य कुछ परेशानियाँ लाते दिख रहे हैं (हड्डियों, हृदय, बॉस से परेशानी), तो सरकारी डॉक्युमेंट्स में न फँसने की कोशिश कीजिए। पेपर्स साफ-सुथरे हों। कोई ऐसा काम न करें जिससे छवि धूमिल हो। पिता से संबंध न बिगाड़ें।
चन्द्र की दशा से परेशानी है (चिंता, नींद न आना, अवसाद), तो वॉक करना शुरू करें। यदि यही वॉक किसी तालाब, नदी या स्विमिंग पूल के आसपास हो, तो चन्द्र के और बेहतर परिणाम मिलेंगे। माँ से संबंध न बिगाड़ें।
मंगल से दिक्कतें हों (कर्ज़, लड़ाई-झगड़े, दुर्घटना), तो रोज़ व्यायाम शुरू करें, पसीना बहाएँ। सुबह उठते ही भूमि को प्रणाम करके पैर ज़मीन पर रखें। ज़मीन पर बैठकर भोजन करें। मित्रों से संबंध न बिगाड़ें।
बुध से दिक्कत (पढ़ाई में रुकावट, बुद्धि भ्रष्ट होना, नर्वस सिस्टम की दिक्कत, श्वास प्रणाली में समस्या) हो, तो उस दौरान किताबें पढ़ें। हर वक़्त आसपास किताब रखें। बहन, बुआ, बेटी से संबंध न बिगाड़ें।
वृहस्पति हालांकि सौम्य ग्रह हैं, पर यदि कभी खराब फल दे रहे हों, जैसे लिवर संबंधी दिक्कत, पेट बढ़ना, थायरॉइड आदि, तो किसी को अपना गुरु बनाइए, गुरु दीक्षा लीजिए। बुज़ुर्गों और गुरुजनों का मान करें।
शुक्र संबंधी दिक्कतें (धन की समस्या, जीवनसाथी से अनबन, संतानोत्पत्ति में दिक्कत, बालों व त्वचा की समस्या आदि) हों, तो प्राइवेट पार्ट्स की हाइजीन का ध्यान रखें। धुले हुए वस्त्र पहनें, परफ्यूम का उपयोग करें, केश साफ-सुथरे रखें। जीवनसाथी का सम्मान करें।
शनि की दिक्कतें (न्यायालय संबंधी परेशानी, लंबी बीमारियाँ, कामकाज ठप होना, नौकरी न लगना) हों, तो कलाई में घड़ी बाँधकर रखें और समय से हर काम करें। नौकर-मज़दूर का पैसा काम होते ही दें तथा उनसे अच्छा व्यवहार रखें। समय को व्यर्थ न गँवाएँ। अपने स्टाफ और निचले तबके के लोगों से अच्छे से पेश आएँ।
राहु की दिक्कत (आकस्मिक घटनाएँ, मिस-अंडरस्टैंडिंग, अज्ञात भय, अज्ञात बीमारियाँ, आए दिन बुखार, सिरदर्द) हो, तो नई टेक्नोलॉजी सीखें। राजनीतिक लोगों से संभलकर रहें। टॉयलेट स्वयं साफ करें। स्वीपर्स का सम्मान करें और उनकी मदद करें।
केतु की दिक्कत (पैर या हाथ के अंगूठे में दिक्कत, कमर या रीढ़ की समस्या, शरीर के किसी अंग में रुकावट या जकड़न, काम चलते-चलते बंद होना) हो, तो अपने कुल की परंपरा का पालन शुरू करें। कुलदेवी-देवता और पितरों को यथायोग्य सम्मान दें। पैर के अंगूठे में चाँदी अथवा रेशमी सफेद धागा बाँधें। रोज़ पेन-कॉपी में कुछ मंत्र आदि लिखें। पितरों को रूठने न दें।इस तरह नौ ग्रहों को संतुलित किया जा सकता है।
यदि कोई गंभीर मरीज है, तो इन्हीं ग्रहों की वस्तुएँ दान करें या पानी में बहाएँ। ऐसे समय ग्रहों का संतुलन तुरंत काम नहीं करता, क्योंकि संतुलन दीर्घकालिक उपाय है, जबकि ग्रहों का दान पेनकिलर की तरह तत्काल काम करता है। दिनचर्या में ग्रहों को संतुलित रखेंगे, तो परेशानियाँ आएँगी ही नहीं। पर यदि आ ही गईं, तो तत्काल प्रभाव के लिए ग्रहों का दान ज़रूरी है।अंत में, हम सभी के 9 ग्रह संतुलित हों, यही प्रयास करना चाहिए ताकि दिक्कतें आएँ ही नहीं। उपरोक्त ग्रहों की दिक्कत न भी हो, तो भी उन उपायों को करें, ताकि वे हमें अपने बुरे प्रभावों से मुक्त रखें।
ज्योतिषाचार्य प्रज्ञा त्रिवेदी – वास्तु/वैदिक/कृष्णमूर्ति ज्योतिष
86020 13672 रायपुर

