Central Samvad रायपुर 26 मई
विश्व ऊदबिलाव दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के लिए अच्छी खबर सामने आई है। गरियाबंद जिले के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के जल स्रोतों में ऊदबिलाव (ओटर) की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। वन विभाग और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के संयुक्त प्रयासों से कैमरा ट्रैप में इसके स्पष्ट चित्र दर्ज किए गए हैं।

वन अधिकारियों के अनुसार यह संकेत है कि उदंती-सीतानदी का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और सुरक्षित है। ऊदबिलाव को स्वच्छ जल स्रोतों का महत्वपूर्ण जैव संकेतक माना जाता है। इसकी मौजूदगी किसी क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को दर्शाती है।
भारत में ऊदबिलाव की तीन प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं और खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ में इन तीनों प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है।

राज्य में वर्ष 2021 से इनके संरक्षण और अध्ययन पर लगातार काम किया जा रहा है।कैमरा ट्रैप और मैदानी अध्ययन के जरिए कोरबा, कांकेर, गरियाबंद और बस्तर क्षेत्रों में ऊदबिलाव की गतिविधियों, आवास और व्यवहार का अध्ययन किया जा रहा है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि स्थानीय लोगों की जागरूकता बढ़ने से संरक्षण अभियान को भी मजबूती मिली है।वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि जल स्रोतों को स्वच्छ रखें, प्लास्टिक और कचरा न फैलाएं तथा जंगलों में आग लगने की सूचना तुरंत विभाग को दें। विशेषज्ञों का मानना है कि सामुदायिक सहभागिता से ही इस दुर्लभ वन्यजीव का संरक्षण संभव है।

