विश्व पर्यावरण दिवस- पहल
Central Samvad रायपुर, 5 जून 2026
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़ी पहलें चर्चा में हैं। छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न हिस्सों में फ्लाई ऐश और अन्य औद्योगिक कचरे के पुनर्चक्रण से पर्यावरण-अनुकूल सड़कों का निर्माण किया जा रहा है।एनएचएआई द्वारा सड़क निर्माण में थर्मल पावर प्लांटों से निकलने वाली फ्लाई ऐश, स्टील उद्योग के स्लैग, पुराने टायरों के रबर और बायो-बिटुमेन जैसी वैकल्पिक सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है। इससे औद्योगिक कचरे के निपटान के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आ रही है।जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अमृत सरोवरों का निर्माण और जीर्णोद्धार किया गया है।

वर्षा जल संचयन के लिए वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। वहीं निर्माण कार्यों और पौधों की सिंचाई में शोधित जल का उपयोग कर जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी एनएचएआई ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

छत्तीसगढ़ के सीतानदी-उदंती अभयारण्य क्षेत्र में लगभग 3 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया जा रहा है, जिससे जंगल और वन्यजीवों पर यातायात का प्रभाव कम होगा। इसके अलावा साउंड बैरियर, मंकी कैनोपी, एलिफेंट पास और एनिमल अंडरपास जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

एनएचएआई सड़कों के किनारे बी-कॉरिडोर और मेडिसिन पार्क विकसित करने की भी योजना पर काम कर रहा है। इससे प्राकृतिक परागण को बढ़ावा मिलेगा और औषधीय पौधों का संरक्षण होगा।

“एक पेड़ माँ के नाम 2.0” अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ढाई लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं।एनएचएआई की ये पहलें आधुनिक सड़क निर्माण के साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के संतुलन का उदाहरण बन रही हैं।

