Central Samvad रायपुर 10 जून 2026
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने “डिजिटल अरेस्ट की धोखाधड़ी से मानवाधिकारों की सुरक्षा” विषय पर एक खुली चर्चा आयोजित की। इसमें साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों को लोगों की सुरक्षा, गरिमा और अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बताया गया।

एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन ने कहा कि पिछले छह वर्षों में साइबर धोखाधड़ी से देश में लगभग 52,976 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसमें डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी की भी बड़ी हिस्सेदारी है।

उन्होंने कहा कि ठग कानून प्रवर्तन एजेंसियों का डर दिखाकर लोगों से पैसे ट्रांसफर करवाते हैं और पीड़ितों के लिए अपनी राशि वापस पाना बेहद कठिन होता है।आयोग के सदस्यों ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने के लिए मौजूदा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।

साथ ही नागरिकों को साइबर अपराध से बचाना सुशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।चर्चा में विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी को मौजूदा कानूनों के तहत एक अलग अपराध के रूप में मान्यता दी जाए, ताकि जांच, अभियोजन और पीड़ितों को राहत देने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सके।

बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि संदिग्ध लेन-देन रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय, पीड़ितों के लिए मुआवजा व्यवस्था, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा, तथा साइबर अपराध के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं।एनएचआरसी ने कहा कि प्राप्त सुझावों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारों के लिए आगे सिफारिशें तैयार की जाएंगी।

