Central Samvadरायपुर, 02 अगस्त 2026
राजधानी रायपुर में आयोजित “स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस” राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वर्तमान समय की चुनौतियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाए गए नए आपराधिक कानून न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन लेकर आए हैं।

उन्होंने कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल साक्ष्य और वैज्ञानिक जांच को न्याय प्रक्रिया का हिस्सा बनाकर न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के लागू होने से औपनिवेशिक दौर के पुराने कानूनों की जगह नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था स्थापित हुई है। उन्होंने बताया कि ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस और इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और विश्वसनीय बनी है। राज्य के सभी पुलिस थाने ऑनलाइन मोड में कार्यरत हैं और अब तक 1.97 लाख से अधिक एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा शुरू होने से अपराध अनुसंधान को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही साइबर अपराधों से निपटने के लिए नौ नए साइबर थाने स्थापित किए गए हैं और जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। उन्होंने नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों के सतत प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता विकास और नियमित मॉनिटरिंग पर भी जोर दिया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों और डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।

उन्होंने कहा कि ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति और डिजिटल फॉरेंसिक जैसी व्यवस्थाएं न्याय प्रणाली को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और समयबद्ध बना रही हैं। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा सहित न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, विधि विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

