भारत और वियतनाम ने आज डिजिटल प्रौद्योगिकी, दुर्लभ खनिज, चिकित्सीय उत्पादों के विनियमन, सार्वजनिक क्षेत्र लेखापरीक्षा, डिजिटल भुगतान प्रणाली, संस्कृति और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। ये समझौते नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई वार्ता के बाद किए गए।बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति बनने के एक महीने के भीतर तो लाम की भारत की पहली राजकीय यात्रा, दोनों देशों के संबंधों को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाती है।उन्होंने भारत यात्रा की शुरुआत, बोध गया से की है। यह हमारे दोनों देशों की साझा सभ्यतागत और आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाता है।

संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और वियतनाम अपने संबंधों को और मजबूत करते हुए एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के स्तर तक ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृति, कनेक्टिविटी, क्षमता निर्माण, सुरक्षा, सस्टेनेबिलिटी और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार पिछले एक दशक में दोगुना होकर लगभग 16 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। वर्ष 2030 तक इसे 25 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।उन्होंने कहा कि दवा क्षेत्र में हुए समझौते से भारतीय दवाइयों की पहुंच वियतनाम में बढ़ेगी। साथ ही, भारत-आसियान ट्रेड एग्रीमेंट (AITIGA) को इस वर्ष के अंत तक अपडेट करने पर भी सहमति बनी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत के कृषि, मत्स्य और पशु उत्पादों का वियतनाम को निर्यात आसान होगा। वित्तीय सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच साझेदारी को मजबूत करने का निर्णय लिया गया है।उन्होंने बताया कि भारत की UPI और वियतनाम की त्वरित भुगतान प्रणाली को जल्द जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।प्रधानमंत्री ने कहा कि वियतनाम, भारत की Act East Policy और Vision Ocean का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

