कानून और करुणा साथ-साथ चलें, तभी सुशासन का वास्तविक अर्थ सामने आएगा।
Central Samvad | संपादकीय रायपुर, 30 जून 2026
रायपुर के धरसींवा विकासखंड स्थित ग्राम सम्मानपुर-नकटी में शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने एक बार फिर विकास, कानून और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर लंबे समय से अवैध कब्जा था और नियमानुसार नोटिस जारी करने के बाद करीब 70 मकानों को हटाया गया। साथ ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था नवा रायपुर के सेक्टर-30 में किए जाने का दावा भी किया गया है।

दूसरी ओर, कार्रवाई के दौरान जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने समाज को झकझोर दिया। खुले आसमान के नीचे अपना सामान समेटते परिवार, रोती महिलाएं, गोद में बच्चों को लिए खड़े माता-पिता और वर्षों से बसे घरों के उजड़ने का दर्द यह याद दिलाता है कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय का सबसे बड़ा प्रभाव आम नागरिक पर पड़ता है।सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे को हटाना प्रशासन की कानूनी जिम्मेदारी है। यदि सरकारी संपत्ति को अतिक्रमण से मुक्त नहीं कराया जाएगा, तो भविष्य में सार्वजनिक परियोजनाएं और योजनाएं प्रभावित होंगी। इसलिए कानून का पालन आवश्यक है और इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती।लेकिन हर कार्रवाई की सफलता केवल बुलडोजर चलाने से नहीं, बल्कि उससे प्रभावित लोगों के सम्मानजनक पुनर्वास और मानवीय व्यवहार से भी तय होती है। यदि प्रभावित परिवारों को समय पर वैकल्पिक आवास, भोजन, पेयजल, शिक्षा और आजीविका की व्यवस्था मिलती है, तो ऐसी कार्रवाई सामाजिक स्वीकार्यता भी प्राप्त करती है।नकटी की घटना प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक सीख है। जहां एक ओर अवैध कब्जों को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता, वहीं दूसरी ओर वर्षों से रह रहे परिवारों के पुनर्वास को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए। कानून और करुणा साथ-साथ चलें, तभी सुशासन का वास्तविक अर्थ सामने आएगा।

