Central Samvad रायपुर, 9 अक्टूबर 2026
एनआईटी रायपुर के शोधार्थी नीरज कुमार दीवांगन ने कम लागत वाली ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे आंगनवाड़ियों में बच्चों की ऊंचाई और वजन मापने व रिकॉर्ड तैयार करने का समय घटेगा। यह प्रणाली इंटरनेट के बिना भी काम कर सकती है और दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों के विकास की निगरानी आसान बनाएगी।

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के नीरज कुमार दीवांगन ने डॉ. राकेश त्रिपाठी और डॉ. श्रीश वर्मा के मार्गदर्शन में पीएच.डी. की अंतिम मौखिक परीक्षा पूरी की। उनके शोध में लोरा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित प्रणाली विकसित की गई है, जो बच्चों के विकास से जुड़े आंकड़े वास्तविक समय में एकत्र कर सकती है। शोध में संस्थान के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव का भी सहयोग रहा।
प्रणाली से बच्चों की ऊंचाई और वजन कुछ सेकंड में मापे जा सकते हैं। पहचान और उपस्थिति भी स्वचालित रूप से दर्ज होती है। जहां पहले पांच से आठ मिनट लगते थे, वहीं अब यह काम एक मिनट से भी कम समय में हो सकता है।आंकड़े क्लाउड पर सुरक्षित रखे जा सकते हैं और इनके आधार पर ऊंचाई, वजन व कुपोषण संबंधी रिपोर्ट तैयार की जा सकती है।
एआई की मदद से भविष्य में कुपोषण के जोखिम वाले बच्चों की पहचान भी संभव होगी।इस तकनीक का परीक्षण आदिवासी क्षेत्रों की आंगनवाड़ियों में किया गया। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का काम आसान बनाना और बच्चों के पोषण व विकास की निगरानी को प्रभावी बनाना है। इस कार्य में एनआईटी रायपुर के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के आदित्य बघेल का भी सहयोग रहा।

