Central Samvad रायपुर, 9 सितंबर 2026
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘रंग परब नाट्य श्रृंखला’ का शुभारंभ बुधवार को मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, रायपुर में हुआ। 9 से 11 सितंबर तक चलने वाली इस श्रृंखला में प्रतिदिन दो नाटकों का मंचन किया जा रहा है।

प्रस्तुतियों में सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाओं और पौराणिक कथाओं को रंगमंच के माध्यम से दर्शाया जा रहा है।शुभारंभ अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज का जीवंत दर्पण है।

रंगमंच सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों को प्रभावी ढंग से सामने लाने के साथ लोगों को सामाजिक बदलाव के लिए प्रेरित करता है।श्रृंखला की पहली प्रस्तुति ‘मया के मुंदरी’ रिखी क्षत्रिय एवं समूह ने दी। दहेज प्रथा पर केंद्रित नाटक में दिखाया गया कि धन-संपत्ति के लालच से विवाह जैसे पवित्र रिश्ते में सौदेबाजी की मानसिकता किस तरह प्रवेश करती है।

नाटक में युवक और उसकी मां दहेज का विरोध करते हुए गरीब लड़की और उसके पिता का समर्थन करते हैं। युवक अंततः बिना दहेज विवाह स्वीकार करता है। प्रस्तुति ने विवाह को विश्वास, सम्मान और समानता पर आधारित संबंध बनाने का संदेश दिया।दूसरी प्रस्तुति ‘हरित सागर’ 7वीं शताब्दी की संस्कृत उत्तरकथा पर आधारित रही। लेखक एवं निर्देशक किशोर वैभव हैं।

भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को सुनाई गई कथा, जलंधर द्वारा उसे सुन लेने, माता पार्वती के श्राप और उससे मुक्ति के प्रसंगों को कलाकारों ने रंगमंच पर प्रस्तुत किया।

