
✍️ कवि निशू पाण्डेय
हाँ, वह गौरैया ही तो थी
जो मेरे आँगन में सपरिवार दाना चुगने आती थी,
संयुक्त कुटुंब होने के अनेक लाभ बताती थी।
हाँ, वह मुर्गा ही तो था
जो प्रातःकाल में बाँग देकर हमें
समय पर जगाता था,
दिन का शुभारंभ कब करें, यह बताता था।
हाँ, वह मैना ही तो थी,
जो आवाज देकर हमें लुभाती और बुलाती थी,
हमें अपनी बात को स्पष्ट बोलना सिखाती थी।
वह कोयल ही तो थी,
जो अपनी सुमधुर वाणी से संगीत के सात सुरों से
हमारा परिचय कराती थी,
व्याकुल मन को शांति की ओर ले जाती थी।
हाँ, वह तोता ही तो था,
जो पेड़ पर लगे फलों पर मोहित होता
और अपने संग अपनी प्रेयसी की भूख मिटाता था।
वह सुंदर सी तितली ही तो थी,
जो अल्प समय में भी जीवन के सभी रंगों के साथ
जीने की कला सिखाती थी,
रंग अबूझ हैं,यह सकारात्मक संदेश भी दे जाती थी।
वह मधुमक्खी ही तो थी ,
जो एकजुट होकर संघर्ष करना सिखाती थी,
गलती से भी कोई छेड़े उसे तो
अपने शस्त्र के सदुपयोग से
दुश्मन को मार भगाती थी।
वह नीलकंठ ही तो था
जो दशहरे में अपने दर्शन देकर
सुख और समृद्धि की प्राप्ति का
आभास कराता और लोगों के
चेहरों पर मुस्कान लाता था।
वह बाज ही तो था जो कितनी भी ऊँचाई पर रहे,
लक्ष्य प्राप्ति हेतु भूमि से जुड़े रहना सिखाता था।
वह चील ही तो थी जो गंदगी का हरण कर
सड़े-गले मांस का भक्षण कर
पर्यावरण को स्वच्छ रखना सिखाती थी।
वह कौवा ही तो था जो पितरों का रूप धारण कर
मेरे घर तक आता था,
भोग लगाए अन्न-जल को ग्रहण कर
श्रद्धा के भाव जगाता था।
आज हम इन्हीं पक्षियों से दूर हैं,
जो शिक्षक के रूप में
हमें संस्कारवान बनाते थे।
आओ, इन्हें बचाने मिलजुलकर करें विचार,
इनके पुनर्जीवन हेतु योजना करें तैयार।
— निशू पांडेय
कवि परिचय
निशु पाण्डेय -प्रदेश मीडिया प्रभारी(भाजपा सांस्कृतिक प्रकोष्ठ)

रंगकर्मी, फिल्ममेकर,कवि
2003 से नाट्य क्षेत्र में सक्रिय,
5 नाटकों का लेखन व निर्देशन,
6 हिंदी लघु फिल्मों के लेखक-निर्देशक,
10+ नाटकों में अभिनय।
स्वलिखित काव्य संग्रह “शब्द संग्राम” के रचयिता,
खजुराहो फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कृत लघु फिल्म “सरदारा”।
2014 से संस्था आर्टकॉम के संचालक,
कला व पर्यावरण के क्षेत्र में 75,000+ पौधारोपण।
“थैंक्यू भिलाई” गीत के लेखक-निर्देशक,
तथा 2022 में “रघु राम राम” की रचना व निर्देशन।

