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रायगढ़
कभी धान के खेतों तक सीमित रहने वाले ईश्वरचरण पैकरा की जिंदगी आज रंग-बिरंगे फूलों की खुशबू से महक रही है। रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के ग्राम गमेकेरा के इस किसान ने परंपरागत खेती की सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए एक नई राह चुनी—फूलों की खेती की राह, जिसने उनकी किस्मत ही बदल दी।

परंपरागत धान से फूलों तक का सफर: कम लागत में ज्यादा मुनाफे लेने की मिसाल बने ईश्वरचरण
जहां पहले मेहनत के बावजूद धान की खेती से सीमित आय होती थी, वहीं अब गेंदा के फूलों ने उनकी आय को 3 से 4 गुना बढ़ा दिया है। वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय बागवानी मिशन और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने 0.400 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा की खेती शुरू की। वैज्ञानिक पद्धति और तकनीकी सहयोग के साथ की गई इस खेती ने उम्मीद से कहीं बेहतर परिणाम दिए।
धान की खेती से जहां उन्हें करीब 11 क्विंटल उत्पादन मिलता था, वहीं फूलों की खेती से लगभग 38 क्विंटल उत्पादन हुआ। इसने उनकी कुल आय को करीब 3 लाख 4 हजार रुपये तक पहुंचा दिया। लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 2 लाख 59 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ—जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।

फूलों की खेती की खास बात यह है कि इसकी मांग साल भर बनी रहती है। शादी, त्योहार, पूजा और आयोजनों में गेंदा, गुलाब और गुलदाउदी जैसे फूलों की लगातार जरूरत किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य दिलाती है।
आज पैकरा के खेतों में खिले गेंदा के फूल सिर्फ रंग नहीं बिखेरते, बल्कि उनकी मेहनत, हौसले और बदलाव की कहानी भी कहते हैं। उनकी सफलता ने गांव के अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है। अब कई किसान उद्यानिकी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं और विभाग से जुड़कर नई संभावनाओं की तलाश में हैं।
ईश्वरचरण पैकरा अब इस खेती को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। उनकी यह यात्रा दिखाती है कि सही मार्गदर्शन और नई सोच के साथ खेती सिर्फ आजीविका नहीं, बल्कि समृद्धि का रास्ता भी बन सकती है।

