Central Samvad रायपुर, 10 जून 2026
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित 16 दिवसीय कला प्रशिक्षण शिविर ‘आकार-2026’ का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भव्य समापन हुआ। महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय परिसर, रायपुर में आयोजित इस शिविर में प्रदेशभर से आए 1281 प्रतिभागियों ने 16 विभिन्न कला विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
समापन समारोह में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, कला और लोक परंपराओं से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं और हस्तशिल्प को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने पर जोर दिया।संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने बताया कि ‘आकार’ केवल प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन का सशक्त माध्यम है।

अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंजीयन शुल्क कम किया गया तथा दिव्यांग एवं अनाथ बच्चों को विशेष रियायत दी गई।शिविर में प्रतिभागियों ने टेराकोटा, जूट शिल्प, गोदना कला, रजवार भित्ति चित्र, मंडला एवं मांडना कला, भरथरी गायन, कथक, लोकनृत्य, लोकसंगीत सहित कई पारंपरिक विधाओं का प्रशिक्षण लिया। साथ ही उन्हें एआई आधारित कला की आधुनिक तकनीकों से भी परिचित कराया गया।समापन अवसर पर प्रशिक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

सांस्कृतिक संध्या में सुवा, कर्मा, पंथी नृत्य, बांसगीत, भरथरी गायन और लोकसंगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

‘आकार-2026’ ने एक बार फिर साबित किया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर केवल विरासत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

