Central Samvad रायपुर, 11 अक्टूबर 2026
75दिनों तक चलने वाले छत्तीसगढ़ के विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा महापर्व की शुरुआत कल शाम पारंपरिक पूजा विधान काछन गादी के साथ हुई। इस दौरान मां काछनदेवी के स्वरूप में पनका समाज की नाबालिग कुंवारी कन्या पीहू दास को बेल के कांटों से बने झूले पर विराजित किया गया।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां काछनदेवी ने इस अनुष्ठान के माध्यम से बस्तर राजपरिवार, क्षेत्र की जनता और प्रशासन को 75 दिनों तक चलने वाले दशहरा महापर्व के आयोजन की अनुमति प्रदान की।करीब सात सौ साल पुरानी इस परंपरा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

अनुष्ठान में बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने मां काछनदेवी के समक्ष शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने गोलबाजार पहुंचकर मिरगान समुदाय की आराध्य देवी मां रैला देवी की पूजा-अर्चना की। इस दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्र मोहरी बाजा की ध्वनि से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, श्रद्धालुओं और देश-विदेश से आए पर्यटकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, समिति के उपाध्यक्ष बलराम मांझी, महापौर संजय पाण्डे, बस्तर संभाग के कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित मांझी-चालकी, नाइक-पाइक, पुजारी, गायता और अन्य गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

