
रायपुर : अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस विशेष
श्रमिक हितों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए लगातार आर्थिक सहायता दी जा रही है। श्रम विभाग के तीनों मंडलों—छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल तथा छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के जरिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है। इसी का परिणाम है कि पिछले 2 साल 4 माह में विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 800 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के खातों में अंतरित किए जा चुके हैं। इस वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत श्रमिकों के 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट निजी स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा।

मजदूर दिवस का इतिहास और उद्देश्य
मजदूर दिवस पूरे विश्व में 1 मई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और बेहतर कार्य परिस्थितियों के लिए जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने और उनके संघर्षों को याद करने का अवसर भी है। वर्ष 1886 में शिकागो के हेमार्केट स्क्वायर में 8 घंटे कार्य दिवस की मांग को लेकर हुए आंदोलन की स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1889 में इसे अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मान्यता दी गई। भारत में इसकी शुरुआत 1923 में चेन्नई से हुई थी। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर ने श्रमिकों के कार्य समय को 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे किया और महिलाओं को प्रसूति अवकाश का अधिकार दिलाया।
श्रम विभाग को सशक्त बनाने पर जोर
श्रम विभाग को सशक्त बनाने पर जोरमुख्यमंत्री साय का मानना है कि श्रम विभाग एक महत्वपूर्ण विभाग है, जो श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ औद्योगिक इकाइयों का तकनीक के माध्यम से औचक निरीक्षण किया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इन प्रयासों से प्रदेश में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है।

कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार
श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के अनुसार, प्रदेश में सुशासन के तहत अब मजदूर का बच्चा मजदूर नहीं रहेगा। श्रम विभाग द्वारा कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार किट योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक सहायता, उत्कृष्ट खेल प्रोत्साहन योजना, श्रमिक आवास सहायता योजना तथा शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच ‘हर हाथ को काम’ के अनुरूप विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 256 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार
श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के अनुसार, प्रदेश में सुशासन के तहत अब मजदूर का बच्चा मजदूर नहीं रहेगा। श्रम विभाग द्वारा कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार किट योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक सहायता, उत्कृष्ट खेल प्रोत्साहन योजना, श्रमिक आवास सहायता योजना तथा शहीद वीर नारायणश्रमिक आवास सहायता योजना तथा शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच ‘हर हाथ को काम’ के अनुरूप विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 256 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
श्रमिकों के लिए सस्ती भोजन और आवास सुविधा।
राज्य सरकार की नीति है कि हर हाथ को काम, उचित दाम और हर पेट को अन्न मिले। इसी दिशा में शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में 38 भोजन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां 5 रुपये में गरम भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना का विस्तार सभी जिलों में किया जा रहा है। श्रमिक आवास सहायता राशि को 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दिया गया है। इसी तरह ई-रिक्शा सहायता राशि भी बढ़ाई जा रही है।
श्रमिक पंजीयन और योजनाओं का प्रभाव
भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत 5 सितंबर 2008 से अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत हो चुके हैं। मंडल द्वारा 26 योजनाएं संचालित की जा रही हैं और 60 श्रमिक वर्ग अधिसूचित हैं। वर्ष 2025-26 में 1 प्रतिशत उपकर से 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि कुल संग्रह 2,808 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। मार्च 2026 तक 2,558 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं में खर्च किए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य और सुरक्षा पर विशेष ध्यान
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कर्मचारी राज्य बीमा सेवाओं के तहत श्रमिकों और उनके परिवारों को चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इस मद में 76 करोड़ 38 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है
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