देशभर के 2,072 परीक्षा केंद्रों पर रियल टाइम पहचान सत्यापन,
Central Samvad रायपुर 4 जून 2026
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा और भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 में फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग किया है। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और किसी अभ्यर्थी के स्थान पर दूसरे व्यक्ति द्वारा परीक्षा देने जैसी धोखाधड़ी को रोकना है।

नई व्यवस्था के तहत परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले प्रत्येक अभ्यर्थी का चेहरे के माध्यम से सत्यापन किया गया। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि आवेदन के समय फोटो अपलोड करने वाला वही उम्मीदवार परीक्षा देने पहुंचा है।यूपीएससी ने यह तकनीक इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के सहयोग से विकसित की है।
इस प्रणाली को देशभर के 2,072 परीक्षा केंद्रों पर लागू किया गया। परीक्षा निरीक्षकों ने अपने एंड्रॉयड मोबाइल फोन के जरिए अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापित की, जिससे अतिरिक्त हार्डवेयर की आवश्यकता नहीं पड़ी।आयोग के अनुसार, किसी उम्मीदवार की पहचान सत्यापित करने में केवल 6 से 8 सेकंड का समय लगा। परीक्षा के दौरान 7,000 से अधिक निरीक्षकों ने इस प्रणाली का उपयोग किया और व्यस्त समय में प्रति मिनट लगभग 12 हजार अभ्यर्थियों का सत्यापन किया गया।
यूपीएससी अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने कहा कि यह कदम परीक्षा की शुचिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के माध्यम से लगभग 5.5 लाख अभ्यर्थियों की पहचान का सफलतापूर्वक सत्यापन किया गया।आयोग का मानना है कि रियल टाइम फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली लोक सेवा परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और तकनीकी नवाचार को और मजबूत करेगी।

